इस हमले ने सऊदी अरब ही नहीं पूरे फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में हंगामा मचा दिया। यह इस इलाक़े में तनाव का नया चरण है जो धीरे धीरे बड़े टकराव की ओर बढ़ सकता है बल्कि यह भी हो सकता है कि कोई जंग छिड़ जाए।
यमन के अंसारुल्लाह ने जिसे बहुत कमज़ोर और पिछड़ा हुआ संगठन बताने की कोशिश की जाती है इस समय समीकरणों की डोर अपने हाथ में ले ली है और अपने शत्रुओं को बार बार भौंचक्का कर रहा है। यह स्थिति तब है जब चार साल से सऊदी एलायंस ने ज़मीन, समुद्र और हवा से यमन पर लगातार बमबारी की है और यह दावा करता रहा है कि उसने यमन की डिफ़ेन्स लाइन पूरी तरह ध्वस्त कर दी है।
पहले तो अंसारुल्लाह ने सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ तथा अन्य प्रमुख नगरों जैसे जिद्दा, ताएफ़, जाज़ान और ख़मीस मुशैयत पर 120 से अधिक मिसाइल बरसा कर सबको हैरानी में डाल दिया था लेकिन इस बार का ड्रोन हमला तो बहुत बड़ा और निर्णायक हमला साबित हुआ है। क्योंकि इस हमले में बड़ी कामयाबी के साथ लक्ष्यों को ध्वस्त किया गया और रणनैतिक आर्थिक लक्ष्यों को चुनकर निशाना बनाया गया। इससे सऊदी अरब के भीतर भी और बाहर भी तेल सेक्टर में काम करने वालों के बीच गहरी चिंता व्याप्त हो गई है। इसलिए कि इस हमले के बाद तेल की मंडियों में हलचल पैदा हो गई है और तेल की क़ीमतों में एक प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इसलिए कि जिस पाइप लाइन को निशाना बनाया गया है उससे पूर्वी सऊदी अरब का तेल पश्चिमी सऊदी अरब की यंबोअ बंदरगाह तक पहुंचता है।
इस हमले में कई बेहद गंभीर पहलू हैं,
सबसे पहली बात तो यह है कि यह हमला इमारात की अलफ़ुजैरा बंदरगाह पर चार सुपर तेल टैंकरों में होने वाली विध्वंसक कार्यवाही के दो दिन बाद हुआ है। इन में दो सुपर तेल टैंकर सऊदी अरब के थे, तीसरा नार्वे का था और चौथे पर इमारात का झंडा था। सऊदी तेल टैंकरों को अधिक नुक़सान पहुंचा है।
दूसरी बात यह है कि अंसारुल्लाह के ड्रोन हमले से साबित हो गया कि उनके मिसाइलों की विध्वंसक क्षमता बहुत अधिक है और वह बड़े सटीक रूप में अपने लक्ष्य को ध्वस्त करने में समर्थ हैं। जिन तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है वह यमन की सीमा से 1000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित हैं। सवाल यह है कि यह ड्रोन इतना लंबा रास्ता तय करने में सफल हो गए और सऊदी अरब का कोई भी राडार उनका पता नहीं लगा सका।
तीसरी बात यह है कि जिस प्रकार के ड्रोन प्रयोग किए गए हैं उनमें एक की क़ीमत 300 डालर से अधिक नहीं है जबकि इस प्रकार के ड्रोन को गिराने के लिए जो पैट्रियट मिसाइल प्रयोग होते हैं उनमें एक मिसाइल की क़ीमत लगभग चालीस लाख डालर है। सैनिक विशेषज्ञों का कहना है कि एक ड्रोन को गिराने के लिए एक से अधिक मिसाइल प्रयोग करने पड़ते हैं।
चौथी बात यह है कि सऊदी अरब ने सैकड़ों अरब डालर ख़र्च करके आधुनिक हथियार ख़रीदे हैं मगर अब हक़ीक़त खुल चुकी है कि उनके प्रतिद्वंद्वियों ने बहुत कम पैसे ख़र्च करके इस प्रकार के हथियार डेवलप कर लिए हैं जिन्हें सऊदी अरब के आधुनिक राडार भी ट्रेस नहीं कर पाते।
पांचवीं बात यह है कि अंसारुल्लाह के एक क़रीबी सूत्रों ने बताया कि हमारे पास यह क्षमता है कि एक साथ दर्जनों ड्रोन विमान उड़ाएं जिनमें सबका पता लगाकर मार गिराना बहुत कठिन होगा और इन ड्रोन विमानों से हम सऊदी अरब के भीतर और बाहर अनेक लक्ष्यों को ध्वस्त कर सकते हैं, हम आने वाले दिनों में जो करने वाले हैं उससे भी सब चौंक जाएंगे।
हमार सामने एक नया मोड़ा है और एक नई लड़ाई की शुरुआत हो रही है। इस समय अधिक ध्यान आर्थिक केन्द्रों को निशाना बनाने पर है और आगे चलकर हो सकता है कि दूसरे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाए जिनमें बंदरगाहें और एयरपोर्ट भी शामिल हो सकते हैं।
ड्रोन विमानों के हमले और अलफ़ुजैरा बंदरगाह पर होने वाले हमले दोनों से ईरान और अमरीका के बीच तनाव बढ़ना तय है। यह हो सकता है कि ड्रोन हमला केवल बानगी हो और आने वाले दिनों में ज़्यादा भयानक हथियारों का प्रयोग किया जाए। ईरान के ताक़तवर समर्थक हुरमुज़ स्ट्रेट से लेकर लेबनान, इराक़ और गज़्ज़ा तक हर जगह मौजूद हैं।
वर्ष 1984 में जब ईरान और इराक़ के बीच युद्ध चल रहा था और तेल टैंकरों पर हमले शुरू हुए थे तो 500 से अधिक तेल टैंकर ध्वस्त हो गए थे। यह 35 साल पहले हुआ था। उस ज़माने में ईरान की ताक़त आज जैसी नहीं थी तो इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यदि इस समय जब ईरान के पास ताक़तवर मिसाइलों के बड़े शस्त्रागार हैं, युद्ध छिड़ गया तो क्या होगा।
अंसारुल्लाह आंदोलन के सात ड्रोन विमानों ने अमरीका तथा उसके घटकों को कई महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। एक संदेश यही है कि शायद ईरान को हुरमुज़ स्ट्रेट बंद करने की ज़रूरत ही न पड़े बल्कि शायद उसे ख़ुद कोई भी मिसाइल फ़ायर करने की ज़रूरत न हो और सारा काम हो जाए। इसलिए कि एसे संगठन और आंदोलन मौजूद हैं जो इसी प्रकार के ड्रोन हमलों से बहुत बड़े काम कर सकते हैं।
इस ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब यमन पर तेज़ बमबारी करेगा और आम नागरिकों को निशाना बनाएगा हालांकि ड्रोन हमले में एक भी आम नागरिक नहीं मारा गया है। मगर सऊदी अरब के इस हमले से कुछ भी बदलने वाला नहीं है।
अमरीकी सेना के पूर्व कमांडर और रियाज़ में अमरीका के वर्तमान राजदूत जान अबी ज़ैद ने एक बयान दिया है जिससे अमरीका की आगामी सामरिक रणनीति का अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अलफ़ुजैरा बंदरगाह पर जो विध्वंसक कार्यवाही हुई है उसकी जांच कराने की ज़रूरत है ताकि हमें पता चले कि क्या हुआ उसके बाद हम उचित प्रतिक्रिया के बारे में सोच सकते हैं और शायद यह प्रतिक्रिया युद्ध के स्तर तक न जाए। इसका मतलब यह है संभावित रूप से अमरीका ईरान के कुछ ठिकानों पर हमला करने की कोशिश करे और अगर अमरीका ने यह किया तो अमरीकी हितों और उसके घटकों पर भयानक युद्ध के द्वार खुल जाएंगे।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के प्रख्यात लेखक व टीकाकार